महामृत्युंजय पुरश्चरण
महामृत्युंजय पुरश्चरण एक अत्यंत शक्तिशाली आध्यात्मिक अनुष्ठान है। इसमें सवा लाख मंत्रों का जप किया जाता है, जिसके बाद दशांश हवन, तर्पण और मार्जन संपन्न होता है। यह अनुष्ठान प्राण शक्ति को जागृत करने और मृत्यु तुल्य कष्टों को दूर करने के लिए अचूक माना गया है।
अनुष्ठान विवरण
महामृत्युंजय मंत्र ऋग्वेद का सबसे शक्तिशाली मंत्र है, जिसे 'मृत्यु पर विजय प्राप्त करने वाला' माना गया है। 'पुरश्चरण' एक विशेष आध्यात्मिक प्रक्रिया है जिसमें मंत्र की शक्ति को जागृत (Activate) किया जाता है। इसमें केवल जप ही नहीं, बल्कि पाँच अनिवार्य अंग शामिल हैं: जप, दशांश हवन, तर्पण, मार्जन और ब्राह्मण भोजन।
वैज्ञानिक और आध्यात्मिक शोध:
ध्वनि विज्ञान (Sound Science): आधुनिक शोध बताते हैं कि महामृत्युंजय मंत्र के अक्षरों का उच्चारण शरीर के सात चक्रों पर सीधा प्रभाव डालता है। 'त्र्यम्बकम्' शब्द की ध्वनि पीनियल ग्रंथि (Pineal Gland) को उत्तेजित करती है, जो मानसिक शांति और शारीरिक आरोग्य के लिए उत्तरदायी है।
कोशिकीय पुनर्जीवन (Cellular Regeneration): मंत्र की ध्वनियाँ शरीर के 'बायो-मैग्नेटिक फील्ड' को व्यवस्थित करती हैं। यह तनाव हार्मोन (Cortisol) को कम कर के शरीर की स्वतः ठीक होने की क्षमता (Self-healing power) को बढ़ाता है।
ज्योतिषीय महत्व: यह अनुष्ठान कुंडली के 'मारक स्थान' (2nd and 7th house) के दोषों को शांत करने के लिए अचूक माना गया है। जब व्यक्ति की आयु पर संकट हो या राहु-केतु की अत्यंत अशुभ दशा चल रही हो, तो यह पुरश्चरण रक्षा कवच की तरह कार्य करता है।
अनुष्ठान के विकल्प
पूजा के लाभ
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अकाल मृत्यु और दुर्घटना के योग का नाश।
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मानसिक शांति और आध्यात्मिक शक्ति में वृद्धि।
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असाध्य और गंभीर रोगों से मुक्ति एवं शीघ्र स्वास्थ्य लाभ।
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अकाल मृत्यु के योग का निवारण और लंबी आयु की प्राप्ति।
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मानसिक तनाव, भय और अवसाद (Depression) का जड़ से नाश।
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शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और मारक ग्रहों के अशुभ प्रभाव में शांति।
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दुर्घटनाओं और अज्ञात संकटों से अभेद्य सुरक्षा कवच का निर्माण।
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कुंडली के कालसर्प दोष और पितृ दोष के प्रभावों में कमी।
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नकारात्मक ऊर्जा और तंत्र बाधाओं से पूर्ण सुरक्षा।
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आध्यात्मिक शक्ति में वृद्धि और चित्त की शुद्धि।
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