नवकुण्डीय शतचण्डी महायज्ञ
शतचण्डी महायज्ञ आदि शक्ति माँ दुर्गा की कृपा प्राप्त करने का सबसे बड़ा अनुष्ठान है। इसमें विद्वान ब्राह्मणों द्वारा सप्तशती के 100 पाठ किए जाते हैं, जिसके बाद विशाल हवन, कन्या पूजन और ब्राह्मण भोजन संपन्न होता है। यह अनुष्ठान व्यक्तिगत और सामूहिक दोनों कल्याण के लिए अमोघ है।
अनुष्ठान विवरण
मार्कण्डेय पुराण के अंतर्गत 'श्री दुर्गा सप्तशती' के 700 श्लोकों का 100 बार पाठ करना 'शतचण्डी' कहलाता है। यह ब्रह्मांडीय ऊर्जा के उस प्रचंड प्रवाह को जाग्रत करता है जो किसी भी प्रकार की नकारात्मकता को भस्म करने में सक्षम है।
अनुष्ठान की तकनीकी और आध्यात्मिक गहराई: 1. सप्तशती की शक्ति: सप्तशती का हर श्लोक एक मंत्र है। 100 पाठों के माध्यम से 70,000 मंत्रों की ऊर्जा जाग्रत होती है। 2. सम्पुट विधान: विशिष्ट कार्यों के लिए पाठ को 'सम्पुट' (विशिष्ट मंत्र को जोड़कर) के साथ किया जाता है, जिससे इसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। 3. दशांश हवन: 100 पाठों के बाद 10 पाठों की संख्या के बराबर (दशांश) आहुतियां दी जाती हैं, जिससे वातावरण शुद्ध और दैवीय ऊर्जा से भर जाता है।
शोध और लाभ: आध्यात्मिक शोध बताते हैं कि शतचण्डी महायज्ञ से उत्पन्न ध्वनि तरंगें और औषधीय हवन का धुआँ सूक्ष्म शरीर (Astral Body) के ब्लॉकेज को खोल देता है। यह अनुष्ठान राजाओं और प्रशासकों द्वारा 'राष्ट्र रक्षा' और 'राजसत्ता' की प्राप्ति के लिए किया जाता रहा है। यह व्यक्ति के जीवन से 'मारक' ग्रहों के प्रभाव को हटाकर उसे अभय प्रदान करता है।
अनुष्ठान के विकल्प
पूजा के लाभ
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घोर दरिद्रता और दुर्भाग्य का समूल नाश।
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असाध्य रोगों से मुक्ति और दीर्घायु।
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समस्त शत्रुओं पर विजय और सामाजिक वर्चस्व।
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असाध्य रोगों, महामारियों और अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति।
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घोर आर्थिक तंगी का नाश और व्यापार में अपार वृद्धि।
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राज-सम्मान, पदोन्नति और राजनीतिक सफलता की प्राप्ति।
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समस्त प्रकार के गृह दोषों और वास्तु दोषों का स्थायी निवारण।
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शत्रुओं का स्वतः पराभव और कानूनी विवादों में विजय।
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वंश वृद्धि और संतान पक्ष की बाधाओं का अंत।
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घर में सुख, शांति और अखंड सौभाग्य का वास।
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मोक्ष की प्राप्ति और आध्यात्मिक चेतना का सर्वोच्च विकास।
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